الشهيد
داؤود
الحلبي
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مجــدَ بـــاريــنـا
المسـيـح |
سَـبِّـحـوا
الـيـومَ بـشَـهبا |
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مــات بــالحــبِّ
ذبــيـــح |
واذكــروا داؤود يــومـــــاً |
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مـن لــه طيـب
الخصـال |
حـلـبٌ تشـــدو
بذكرى |
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فـيـصـلاً صـدق
المقـال |
أبـيــض الـــكـــفّ
نــقــيـاً |
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أَرضَعَتْ حُبَّ
المسيح |
صـــادق
الــبرِّ بــأمٍّ |
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خيرَ
قربانٍ صحيح |
لـولـيـدٍ
قـد تَـبَـدَّى |
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خيرَ أزواج
النساء |
خيرَ من ربى
بنيناً |
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رأسُهُ
ربُّ السماء |
أسسَ البيت
بصخرٍ |
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ليس يثنيهِ الوعيد |
لا يحابي
وجه شخصٍ |
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يبتغي
المجد
العتيد |
مستقيم
الرأي دوماً |
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صاغَ أقوال
الرياء |
عاملُ
الجزية
حِقداً |
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خَلعوا سَترَ
الحياء |
وسعى نحو
قضاةٍ |
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في
عداد
الظالمين |
فارتضى داؤود
حبساً |
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حررت قلب
السجين |
رازحاً
تحت قيودٍ |
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يرهب العبد
الأمين |
وانبرى
الوالي
مراراً |
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أو بتعذيب
البنين |
أن يسوم
الأهل ظلماً |
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زائلٍ
عند الرجوع |
رَغَّبَ
النفسَ
بمجدٍ |
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إنما ربي
يسوع |
زاد
بالباشا
صراخاً |
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يبطن القول
الصحيح |
أرسلوا الأهل
لكي ما |
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إنما الرب
المسيح |
فانبرى
يزداد قولاً |
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أو يزعزعك
العذاب؟ |
قيلَ ما
تخشى
وعيداً؟ |
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صادق
العشقِ الرِّغاب |
قال: إن
الرب يعطي |
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حَكَّموا
كالظالمين |
أعملواً
سَبَّاً
وشتماً |
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ثَبَّتَ
العبدَ
الأمين |
قطَّعَ
الأكتاف
سيفٌ |
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عندما
الرأسُ
قُطِع |
عانقَ
النورُ المحيا |
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صكَّ
إعدامٍ
رَفَع |
سَلَّمَ
الروحَ
لبارٍ |
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قد مُنِحنا
بالصليب |
فاقتنى
بالنجع
وعداً |
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صادقٌ وعدُ
الحبيب |
أنَّ من مات
سَيَحيَا |
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لاسم
فادينا
المجيد |
سَبِّحوا
اليوم بشهبا |
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ذاك داؤود
المجيد |
واذكروا
فيها شفيعاً |
بقلم
مالك
جميل كنهوش
طلباً
لشفاعة
الشهيد في
القديسين داؤود
الحلبي
حلب 23/2/2006